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| BNSS 2023 के अनुसार जमानत की कानूनी प्रक्रिया |
भारत में आपराधिक प्रक्रिया अब Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS 2023) से संचालित होती है।
जमानत (Bail) से जुड़े प्रावधान मुख्यतः धारा 478 से 492 के बीच दिए गए हैं (संरचना पुराने CrPC के समान है)।
अब इसे पूरी तरह step-by-step समझते हैं।
जमानत सज़ा नहीं है। यह केवल मुकदमे के दौरान अस्थायी रिहाई है।
उद्देश्य: --
आरोपी कोर्ट में उपस्थित रहे
जांच में सहयोग करे
सबूतों से छेड़छाड़ न करे
जमानती अपराध में जमानत अधिकार है /
पुलिस अधिकारी जमानत देने से मना नहीं कर सकता /
थाने से ही बेल मिल सकती है /
उदाहरण:--
साधारण मारपीट
मानहानि
छोटे स्तर की चोट
यहाँ आरोपी को ज़मानत बॉन्ड भरना होता है।
धारा 480 के अनुसार: --
जमानत स्वतः अधिकार नहीं
कोर्ट के विवेक पर निर्भर
अपराध की गंभीरता देखी जाती है
📌 कोर्ट किन बातों पर विचार करता है:-
अपराध की प्रकृति
आरोपी का पिछला रिकॉर्ड
भागने की संभावना
गवाहों को प्रभावित करने की आशंका
उदाहरण:--
हत्या
बलात्कार
दहेज मृत्यु
अगर किसी व्यक्ति को आशंका है कि उसे गिरफ्तार किया जा सकता है, तो वह सेशन कोर्ट या हाईकोर्ट में
अग्रिम जमानत की याचिका दे सकता है।
कोर्ट शर्तें लगा सकता है:--
जांच में सहयोग
पासपोर्ट जमा करना
देश छोड़कर न जाना
पुलिस FIR दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार करती है।
BNSS के अनुसार, आरोपी को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य है।
वकील लिखित जमानत अर्जी देता है।
सरकारी वकील (APP) आपत्ति दर्ज कर सकता है।
जज आदेश देता है:
जमानत मंजूर
या
जमानत खारिज
अगर पुलिस:--
60 दिन (साधारण अपराध)
90 दिन (गंभीर अपराध)
के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं करती, तो आरोपी को डिफॉल्ट बेल का अधिकार मिल जाता है।
यह अधिकार है, कोर्ट मना नहीं कर सकता।
Regular Bail – गिरफ्तारी के बाद
Interim Bail – अस्थायी राहत जब तक अंतिम आदेश न आए
अगर आरोपी:--
शर्तों का उल्लंघन करे
गवाहों को धमकाए
सबूतों से छेड़छाड़ करे
तो कोर्ट जमानत रद्द कर सकता है।
मतलब--
✔️ महिला आरोपी
✔️ बुजुर्ग
✔️ गंभीर बीमारी
✔️ पहली बार अपराध
हाँ।
अगर परिस्थिति बदलती है या नए आधार मिलते हैं, तो दोबारा आवेदन किया जा सकता है।
Q1. क्या हर केस में जमानत मिलती है ?
नहीं। Non-bailable मामलों में कोर्ट निर्णय लेता है।
Q2. क्या पुलिस जमानत रोक सकती है?
Bailable offence में नहीं।
Q3. जमानत में कितना समय लगता है?
मामले की प्रकृति पर निर्भर करता है।
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