Sarkari Naukri Kaise Paye 2026 (UP Guide) | तैयारी का सही तरीका सिर्फ 6 महीने में/
theThe Constitutional India is an independent digital platform dedicated to delivering accurate, fact-based news and in-depth analysis on current affairs, constitutional issues, politics, and social matters. Our mission is to inform, educate, and empower readers by presenting complex topics in a clear, unbiased, and easy-to-understand manner. We focus on responsible journalism, factual reporting, and meaningful insights that help citizens understand their rights, laws, and the democratic system
![]() |
| समान नागरिक संहिता (UCC) – Article 44 और भारतीय संविधान की बहस |
भारत एक विविधताओं वाला देश है ,अलग-अलग धर्म, परंपराएँ और व्यक्तिगत कानून (Personal Laws)।
लेकिन सवाल यह है , क्या एक लोकतांत्रिक देश में सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार जैसे मामलों में समान कानून होना चाहिए ?
यही सवाल Uniform Civil Code (UCC) की बहस का मूल है।
देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून, चाहे वे किसी भी धर्म के हों।
यह कानून लागू होगा.........
विवाह
तलाक
गुजारा भत्ता
उत्तराधिकार
गोद लेना
UCC का उल्लेख भारतीय संविधान के--
यह राज्य के नीति निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy) का हिस्सा है।
Article 44 कहता है ,राज्य भारत के समस्त क्षेत्र में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।
Directive Principles न्यायालय द्वारा लागू (enforceable) नहीं होते, लेकिन शासन के मार्गदर्शक सिद्धांत होते हैं।
वर्तमान में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग व्यक्तिगत कानून हैं----
हिंदू कानून (Hindu Marriage Act, 1955)
मुस्लिम पर्सनल लॉ
ईसाई विवाह अधिनियम
पारसी विवाह अधिनियम
इसलिए विवाह और तलाक के नियम धर्म के आधार पर बदल जाते हैं।
संविधान का Article 14 — सभी के लिए समानता।
अगर कानून धर्म के आधार पर अलग-अलग है, तो क्या यह समानता के सिद्धांत के विपरीत है ?
कई मामलों में व्यक्तिगत कानूनों में महिलाओं को समान अधिकार नहीं मिलते।
उदाहरण---
तलाक
बहुविवाह
उत्तराधिकार
समर्थकों का मानना है कि एक समान कानून राष्ट्रीय एकता को मजबूत करेगा।
संविधान का Article 25 धार्मिक स्वतंत्रता देता है।
विरोध करने वाले कहते हैं कि , UCC धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप हो सकता है।
भारत में सांस्कृतिक विविधता बहुत व्यापक है। एक समान कानून सब पर लागू करना जटिल हो सकता है।
कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने UCC की आवश्यकता पर टिप्पणी की।
इन मामलों में न्यायालय ने कहा कि समान नागरिक संहिता राष्ट्रीय हित में हो सकती है।
हाँ।
7 फरवरी 2024 को उत्तराखण्ड ने एक ऐसा अध्याय लिखा, जो भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया।
इसे अक्सर UCC के मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
हाल के वर्षों में UCC पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हुई है। कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है।
संवैधानिक संतुलन UCC की बहस मूलतः इन दो अधिकारों के बीच संतुलन है---
समानता का अधिकार
धार्मिक स्वतंत्रता
यह बहस कानूनी से अधिक सामाजिक और राजनीतिक भी है।
क्या UCC पूरे भारत में लागू है?
Article 44 क्या कहता है?
UCC और धार्मिक स्वतंत्रता में टकराव क्यों है ?
क्या गोवा में UCC लागू है?
Comments
Post a Comment