Sarkari Naukri Kaise Paye 2026 (UP Guide) | तैयारी का सही तरीका सिर्फ 6 महीने में/

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Judicial Review in India- अर्थ, आधार और प्रमुख निर्णय (Hindi)

 

Judicial Review in India explained
Judicial Review – भारतीय संविधान में न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति

                Judicial Review in India 

(भारत में न्यायिक पुनरावलोकन)  अर्थ- आधार और प्रमुख निर्णय


क्या संसद या सरकार द्वारा बनाए गए हर कानून को अंतिम माना जाए ? या कोई संस्था है जो यह जांच सके कि वह संविधान के अनुरूप है या नहीं?

भारत में इस शक्ति को कहते हैं  Judicial Review (न्यायिक पुनरावलोकन)। यह भारतीय लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक व्यवस्थाओं में से एक है।

1.                       Judicial Review क्या है  ?

न्यायालयों की वह शक्ति जिसके माध्यम से वे किसी भी कानून, कार्यपालिका के आदेश या 

संवैधानिक संशोधन की वैधता की जांच कर सकते हैं। यदि कोई कानून संविधान के विरुद्ध पाया जाता है, तो न्यायालय उसे अवैध ,Unconstitutional घोषित कर सकता है।

2.                     संवैधानिक आधार

भारत में Judicial Review का स्पष्ट उल्लेख कई अनुच्छेदों में मिलता है  -

Article 13 , Constitution of India

यह कहता है कि मौलिक अधिकारों के विरुद्ध कोई भी कानून शून्य होगा।

Article 32 , Constitution of India

यह नागरिकों को सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार देता है।

Article 226 , Constitution of India

यह उच्च न्यायालयों को रिट जारी करने की शक्ति देता है।


3.              Judicial Review की उत्पत्ति  ---

यह अवधारणा अमेरिका से आई मानी जाती है, जहाँ 1803 के Marbury v. Madison केस में इसका विकास हुआ।भारत ने इसे अपने संविधान में शामिल किया ताकि लोकतंत्र संतुलित रहे।



                 प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के निर्णय

1.        Kesavananda Bharati v. State of Kerala

            इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संसद की संशोधन शक्ति असीमित नहीं है।

2.       Minerva Mills v. Union of India

            न्यायालय ने कहा कि सीमित संशोधन शक्ति स्वयं संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है।

3.       I.R. Coelho v. State of Tamil Nadu

           यहाँ न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 9वीं अनुसूची में डाले गए कानून भी न्यायिक समीक्षा से बाहर नहीं हैं।

https://www.sci.gov.in/

https://indiacode.nic.in

4.         Judicial Review क्यों महत्वपूर्ण है ?

 1. संविधान की सर्वोच्चता बनाए रखना

 2. नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा

 3. शक्तियों के विभाजन (Separation of Powers) को संतुलित रखना

 4. लोकतंत्र को बहुमत के दुरुपयोग से बचाना

                           आलोचना

      कुछ लोग कहते हैं  इससे न्यायपालिका अत्यधिक शक्तिशाली हो जाती है ,यह संसद की सर्वोच्चता को सीमित        करता है , लेकिन समर्थकों का तर्क है कि यही लोकतंत्र की सुरक्षा है।

 भारत का Judicial Review मॉडल comparative constitutional law में पढ़ाया जाता है।  कई देशों ने         भारत के अनुभव से सीख ली है।

Judicial Review केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है   ,यह संविधान और नागरिकों के बीच विश्वास की कड़ी है। अगर यह शक्ति न हो, तो कोई भी असंवैधानिक कानून नागरिकों के अधिकारों को कमजोर कर सकता है। इसलिए, Judicial Review भारतीय लोकतंत्र का सुरक्षा कवच है।


एक जागरूक नागरिक और संविधान अध्ययन के विद्यार्थी के रूप में मेरा मानना है कि Judicial Review लोकतंत्र की वह सुरक्षा रेखा है, जो सत्ता को सीमाओं में रखती है।


     F-A-Q

Q1- क्या संसद Judicial Review को समाप्त कर सकती है ?

नहीं, क्योंकि यह संविधान की मूल संरचना का हिस्सा माना जाता है।

Q2- क्या हाई कोर्ट भी Judicial Review कर सकता है -?

हाँ, Article 226 के तहत।

Q3- क्या हर कानून न्यायिक समीक्षा के अधीन है -?

हाँ, यदि वह संविधान से टकराता है।

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