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| Kesavananda Bharati Case (1973) – Birth of Basic Structure Doctrine |
क्या संसद भारतीय संविधान में कोई भी संशोधन कर सकती है? क्या वह मौलिक अधिकारों को भी पूरी तरह बदल सकती है?
यह फैसला 24 अप्रैल 1973 को सुनाया गया और इसे भारतीय संवैधानिक इतिहास का turning point माना जाता है।
केरल के एक मठ एडनीर मठ के प्रमुख थे स्वामी केशवानंद भारती। 1969 में केरल सरकार ने भूमि सुधार कानून
लागू किया, जिसके तहत मठ की संपत्ति प्रभावित हुई। स्वामी जी ने इसे अपने मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
मुख्य प्रश्न यह था ,क्या संसद को संविधान के किसी भी भाग में, यहाँ तक कि मौलिक अधिकारों में भी, असीमित संशोधन करने की शक्ति है?
यह अब तक की सबसे बड़ी संवैधानिक पीठ थी , 13 न्यायाधीश।
बहस 68 दिनों तक चली — जो भारतीय न्यायिक इतिहास में सबसे लंबी सुनवाई में से एक है।
7–6 के बहुमत से सुप्रीम कोर्ट ने कहा-
संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, लेकिन वह संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) को नष्ट नहीं कर सकती ,यहीं से Basic Structure Doctrine की शुरुआत हुई।
न्यायालय ने पूरी सूची नहीं दी, लेकिन कुछ तत्व बताए--------
संविधान की सर्वोच्चता
गणतांत्रिक और लोकतांत्रिक शासन
धर्मनिरपेक्षता
न्यायपालिका की स्वतंत्रता
न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review)
संघीय ढांचा
इन सिद्धांतों को संसद बदल नहीं सकती।
इस फैसले ने संसद की शक्ति को सीमित किया ,न्यायपालिका की भूमिका मजबूत की, संविधान की स्थिरता सुनिश्चित की ,बाद के कई महत्वपूर्ण मामलों में इस सिद्धांत को लागू किया गया।
कोर्ट ने चुनाव संबंधी संशोधन को Basic Structure के आधार पर निरस्त किया।
यहाँ कोर्ट ने कहा कि सीमित संशोधन शक्ति स्वयं मूल संरचना का हिस्सा है।
Date: 24 April 1973
https://indiankanoon.org/doc/257876/
कुछ लोग मानते हैं---
न्यायपालिका ने संसद की शक्ति कम कर दी
यह Judicial Overreach है
दूसरी ओर, समर्थकों का कहना है--
यह लोकतंत्र की सुरक्षा है
यह संविधान को ,मनमानी से बचाता है
जब हम इस निर्णय को पढ़ते हैं, तो यह केवल एक कानूनी विवाद नहीं लगता ,यह सत्ता और संविधान के बीच संतुलन की कहानी है।
अगर यह फैसला न आता, तो शायद संसद के पास असीमित शक्ति होती। लेकिन इस निर्णय ने यह स्पष्ट कर दिया कि संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं ,यह लोकतंत्र की आत्मा है।
Supreme Court of India (Official Website)
India Code Portal
Indian Kanoon (Judgment Text)
Q1- केशवानंद भारती केस कब हुआ ?
24 अप्रैल 1973 को फैसला सुनाया गया।
Q2- इस केस में कितने जज थे ?
13 जजों की पीठ।
Q3- Basic Structure Doctrine किस केस से आया ?
Kesavananda Bharati v. State of Kerala (1973) ।
यह निर्णय भारतीय लोकतंत्र की दिशा तय करने वाला ऐतिहासिक मोड़ था।
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